Monday, February 22, 2016

अभिव्यक्ति की आजादी



जिस भारत की बर्बादी के तुमने लगाये नारे
अभिव्यक्ति की ये आजादी तुझको दी इसी ने प्यारे

"कितने सैनिक मारोगे ,घर घर से सैनिक निकलेंगे
दुश्मन तेरी बर्बादी तक हम लड़ेंगे हम कटेंगे
है अगर देश के लिए अभिमान मन में प्यारे
जाकर सीमा पर लगाओ  फिर अब तुम ये नारे

धब्बे तुम्हारे दामन के यूँ  ही नही मिटेंगे
कतरे  तेरे लहू के जब तक देश को न सींचेंगे ।
*सुनीता अग्रवाल (नेह) *
देश की बर्बादी के नारे लगाने वाले अब jnu में शरण लिए हुए है अभी तक न तो उन्होंने आत्म समर्पण किया है न पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर पायी है । अजीब बात । आखिर क्यों विश्वविद्यालय उन्हें बचाना चाहता है। .अगर उन्होंने कोई गलत काम नहींकिया तो डरने की क्या आवश्यकता है ?क्यों नही अपनी बेगुनाही का सबूत देते है ? और विश्वविद्यालय शिक्षक संघ फिर कन्हैया को छुड़ाने के लिए तत्पर क्यों नही दीखते ? हद है बौद्धिकता की ।

Thursday, February 18, 2016

हे भारती कर दो क्षमा ...

पहले jnu तदोपरांत जादवपुर विश्वविद्यालय में जो कुछ घटित हुआ वो बेहद शर्मनाक है अपने ही देश  के खिलाफ नारे लगाना। ये किस दिशा में चल पड़ी है ये नयी पढ़ी लिखी पीढ़ी। ये कैसी आग लगा रहे  है सियासतदार अपने ही देश में। अफ़सोस जनक होने के साथ विचारणीय मुद्दा है ये आखिर युवाओं में ये भावना क्यों कैसे पनपी इन पे गहराई से अध्ययन करना होगा वरना ये आग नई फसलो को निगल  जाएगी ,,,,
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क्षमस्व क्षमस्व हे भारती  कर दो क्षमा ...

वन्दे मातरम ,जय हिन्द का नारा जहाँ  गूंजता घर घर में
आतंकियों का महिमामंडन अब हो रहा उस भारत वर्ष  में ।

सत्य अहिंसा और प्रेम की  बहती थी रसधार जहाँ
बहा दिया नफरत का दरिया भारती तेरे ही लालो  ने ।

वीरो ने  जान गँवा  दी जिस  माँ की लाज बचाने को
मंडी  में पहुचा दिया उसको आजादी के दल्लो ने ।

भगत ,सुभाष, गाँधी की मूर्ति सडको पर है लगी हुयी
चोर ,लुटेरे ,आतंकी अब पूजित हो रहे मदिर में ।

शस्य श्यामला भूमि ये जाति ,धर्म में बंट गयी
वोटो के व्यापारियों ने  आग लगा दी फसलो में ।

क्षमस्व क्षमस्व हे भारती  कर दो क्षमा ...