एक नज़र ..चलते चलते

Friday, February 22, 2013

ये मजबूरी

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है कैसी ये मजबूरी तुम दिन को अगर रात कहो रात कहते हम भी गर दिन को  मैं कहु दिन तुम नाराज हो जाते हो दिखने लगते हो दुनिया के नक़्शे में ...
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Sunday, February 17, 2013

कैनवास

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जादुई तुली भरने लगी रंग सूने  कैनवास पर  विविध न्यारे प्यारे जीवन भरे कभी फूलों से चुरा कभी मौसम से ले  उधार उभरने लगी तस्वीर मनचाही न...
Thursday, February 14, 2013

saraswati vandana

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बुद्धिदयिनी श्वेत्वस्त्रावृता शारदे हंसावाहिनी कर दो उज्जवल मेरा अंतर्मन भी ************  आम्र मंजरी दूँ पुष्पांजलि माते भर अ...
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सुनीता अग्रवाल "नेह"
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