एक नज़र ..चलते चलते

Wednesday, February 18, 2015

कभी पुकारोगे हमें

›
जब भी नज्मों में आपकी हम ढलते है बनकर खुशबू सहरा में हम बिखरते है । उड़ा  ले न जाए आँधियाँ ये धूल भरी सीप बन तेरी आगोश में छुपे रह...
Friday, February 13, 2015

कुछ गीत अधूरे रहने दो

›
कुछ दर्द अधूरे रहने दो कुछ सर्द हवाएँ बहने दो सिलसिले  रहे यूँ ही चलते कुछ हर्फ़ अधूरे रहने दो ****************** तेरी खामोश नजरो न...
Thursday, February 12, 2015

लिखा है मौन

›
१ ) अनुबंध -------------- फूल -तितली  अम्बर -धरा  सागर -नदी  सृष्टि के आरंभ से  बंधे है प्रीत की डोर बिना अनुबंध ****************** २) लि...
‹
›
Home
View web version

Myself

My photo
सुनीता अग्रवाल "नेह"
View my complete profile
Powered by Blogger.