एक नज़र ..चलते चलते

Sunday, May 31, 2015

बेवफा

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मुक्तक एक प्रयास ------------------------------------------- किन रिश्तों की अब वो बात करते हैं जिन्हे बाजार में नीलाम करते है सितम सह...

अंतिम कश

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क्षणिका ---------------- बेबस देखता रहा टकटकी लगाये छलकती ,ममतामयी आँखें दम तोड़ती पिता की अभिलाषाएं धीरे -धीरे धुएं के छल्लो में ...
Thursday, May 28, 2015

बादल उत्पाती

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क्षणिका ----------- ओ हवाओ अब तो गति लो बादल उत्पाती चले गाँव पिया के मोड़ दो रुख दे दो पता मेरे घर का
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सुनीता अग्रवाल "नेह"
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