एक नज़र ..चलते चलते

Tuesday, February 14, 2017

ये सैलाब आँखों में जलता बहुत है

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मिलने को तुमसे मचलता बहुत है  ये सैलाब आँखों में जलता बहुत है  ढुलके तो तुम पर ये कर दे न जाहिर  दिल पे इख्तियार अब भी तुम्हारा ब...
Friday, February 10, 2017

इन्तजार

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इन्तजार की घड़ियां इतनी दुखदायी न थी , मिलन की आरजू इस कदर परायी न थी , ये कौन सी राह पर चल पड़ा ऐ !दिल बता , तन्हाईयों में भी इस कदर तन...
Saturday, January 21, 2017

नदी का जूनून

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राक्षसी मुखौटे लगाये उफनती लहरे बार बार किनारो पर धकेल देती है भरसक कोशिश करती है डराने  की मौत का भय दिखाती है पर  हिम मानवो की...
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सुनीता अग्रवाल "नेह"
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