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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *
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Friday, May 20, 2016

सांझी अंगीठी



त्रिवेणी :-
सांझी अंगीठी 
गरम प्यालियाँ चिल्लाते कूकर झगड़ते प्लेट्स ,
आज सभी सुस्त है बीमार है आक्सीजन तलाश रहे हैं ,

साँझी अंगीठी ने धुँआ  उगलना बंद कर दिया है  ।

Wednesday, September 17, 2014

त्रिवेणी -ऐ इश्क तेरी ये फितरत





त्रिवेणी विधा में लिखने का एक प्रयास ... पाठको की समीक्षा का स्वागत है -

१)
राख से धुँआ उठा देती है
बनके दरिया प्यास बढ़ा  देती है

ऐ इश्क तेरी फितरत डराती है मुझे  !!!

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२)
जा बैठा मंदिर में बन गया है ईश्वर
छूना मना है मुझको वो पावन प्रस्तर

इन हाथो ने बड़े प्रेम से तराशा था जिसे !!!
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