.

Showing posts with label त्रिवेणी. Show all posts
Showing posts with label त्रिवेणी. Show all posts
Friday, May 20, 2016
Wednesday, September 17, 2014
त्रिवेणी -ऐ इश्क तेरी ये फितरत
त्रिवेणी विधा में लिखने का एक प्रयास ... पाठको की समीक्षा का स्वागत है -
१)
राख से धुँआ उठा देती है
बनके दरिया प्यास बढ़ा देती है
ऐ इश्क तेरी फितरत डराती है मुझे !!!
=============================
२)
जा बैठा मंदिर में बन गया है ईश्वर
छूना मना है मुझको वो पावन प्रस्तर
इन हाथो ने बड़े प्रेम से तराशा था जिसे !!!
==============================
Subscribe to:
Posts (Atom)