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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *
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Monday, July 30, 2018

जोड़ रहे हैं दो कुटुंब दिल से दिल की लड़ियाँ

मौका था भतीजी की शादी का फरमाईश थी परिजनों की तो इस उत्साह भरे माहौल में कोशिश की स्वरचित कुछ  गुनगुनाने की :)

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रेशम का धागा ,फेविकोल ,न हथकड़ियाँ 

जोड़ रहे है दो कुटुंब दिल से दिल की लड़ियाँ  

बड़े नसीबो से आई ये रात मुरादों वाली 
चंदा सी लाडो मेरी बन गयी दुल्हनिया 

सूरज न चंदा फिर जगमग है ये आँगन 
इन्दर जैसा दूल्हा राजा  लेने आया सजनिया 

राम जानकी सी ये जोड़ी है बनायीं रब ने 
देव पित्तर और सम्बन्धी दे रहे है बधाईयाँ 
                           --सुनीता अग्रवाल "नेह "

Tuesday, February 14, 2017

ये सैलाब आँखों में जलता बहुत है


मिलने को तुमसे मचलता बहुत है 
ये सैलाब आँखों में जलता बहुत है 

ढुलके तो तुम पर ये कर दे न जाहिर 
दिल पे इख्तियार अब भी तुम्हारा बहुत है 

Thursday, January 19, 2017

एक ग़ज़ल,अधूरी बात-



वो जो लिखी थी कभी एक ग़ज़ल तुमने
रिस रिस के बह  रही है आज जिस्म से मेरे ॥


छोड़ गए थे तुम जहाँ बात अधूरी
ठहरे हैं वहीँ पर अब तलक लफ्ज़ मेरे ॥ 


Friday, December 2, 2016

हम कुछ नही कहते


यूँही  दो लाइन में मन की बात लिखने की कोशिश :)
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पुराने जख्मो का उनसे क्या करना ज़िकर

इश्क फिर सामने खड़ा है नया फरेब लेकर ।
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बीत जाते है मेरे दिन रात उन्हें देखते सुनते
उनको ये गम है कि हम कुछ नही कहते  । 


**Neh sunita**(Sunita Agarwal)

Thursday, July 7, 2016

यूँ ही चलते चलते .... दो लाइन (१)



यूँ ही चलते चलते  .... दो लाइन
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१)
नजर तुझसे हटती नहीं नजारों का क्या करूँ
तुझसे ही आबाद जिंदगी बहारों का करूँ  ।
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२)
लानतों मलालतो का दौर है थोड़ा और चलने दो
ये खुशबू  है प्यार की खुलकर बिखरने दो  ।
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३)
मेरी मैय्यत पर  जब आना थोड़ी मुस्कान ले आना ,
अच्छा नहीं होता मुर्दे की खातिर फूलों को सजा  देना  ।
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४)
सुना है तन्हाईयाँ ,रुस्वाइयाँ ,बेवफाईयाँ ,सौगाते है इश्क की ,
छोडो सनम माफ़ करो  ये इश्क नहीं मुझ गरीब के बस की ।
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