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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *
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Thursday, February 14, 2019

हो गयी रूह संत

वजहें तमाम थी
तुम्हे प्यार न करने की
पर प्यार के लिए किसी  वजह की जरूरत नहीं पड़ती
इतना ही समझा मैंने
और  घुलते गए तुम मुझमें
जैसे अंधकार में घुलता है
प्राची का लालित्य
और फूटने लगता है उजाला
एक छोर से
और धीरे धीरे हड़प लेता है
पूरा  आसमान

उसने देखा
हुआ मन बसंत
उसने छुआ
हुयी देह अनंत
उसका जाना
 हो गयी रूह संत

Friday, September 21, 2018

प्रतीक्षा (क्षणिकायें )


१)
मैं
 

आरती थाल में सजी 
कर्पूर की डली
कभी मिलना मुझसे 
तुम अग्नि की तरह 

की बस
बची रह जाये सुंगध
उस मिलन उत्सव के बाद
जीवन भर
***************
२)
बीत तो जायेंगी
यूँ चुटकियों में
घड़ियाँ
प्रतीक्षा की
इतना दिलासा भर देते जाओ
कि
लौटोगे
सूरज के बुझने
से पहले
 
***************
३)
ये जो आज फिर व्यस्तता की आड़ लेकर
 तुमने टाल दिया  मेरे सवाल का जवाब
" बाद में बताता हूँ " कह कर
ऐसे कई " बाद में "और ' कल " मेरा उधार है तुम पर
न ..न.. मुझे कोई जल्दी भी नही है
इत्मीनान से चुकाना तुम ये उधार 

जीवन  के  उस बेला में
जब तुम्हारे पास करने को कुछ न हो
जब तुम्हारे पास तुम्हारी बातों को सुनने वाला कोई न हो
तब खोल लेना मेरे सवालों का बही खाता
और इत्मीनान से देते जाना जवाब
हालांकि उस समय तक मेरे लिए वो अर्थहीन हो चुके होंगे
पर फिर भी
मैं बड़े चाव से सुनूँगी तुम्हारी बातों को
ताकि तुम्हारे ठहरे हुए जीवन को
मिल सके पुनः एक नया लक्ष्य
*****************************


Tuesday, July 11, 2017

मुखौटा


मुखौटा
_________


१)
मुखौटे के पीछे का सच

जानते हुए भी
रास आ
 रहा है 
अनजान बने रहना
सध रहे है
दोनों के स्वार्थ
मुखौटे की आड़
-----------------------------
2)
भूल गए तुम कि
हवा से भी पर्दा करना था
भूल गए तुम कि
नर्म से नर्म घास भी होती हैं चुगलखोर
हाँ ..
भूल गए तुम कि ...
मुखौटे से केवल चेहरा छुपता है
गंध और आहट नही ....

Thursday, July 7, 2016

यूँ ही चलते चलते .... दो लाइन (१)



यूँ ही चलते चलते  .... दो लाइन
___________________________
१)
नजर तुझसे हटती नहीं नजारों का क्या करूँ
तुझसे ही आबाद जिंदगी बहारों का करूँ  ।
********************************
२)
लानतों मलालतो का दौर है थोड़ा और चलने दो
ये खुशबू  है प्यार की खुलकर बिखरने दो  ।
*********************************
३)
मेरी मैय्यत पर  जब आना थोड़ी मुस्कान ले आना ,
अच्छा नहीं होता मुर्दे की खातिर फूलों को सजा  देना  ।
************************************
४)
सुना है तन्हाईयाँ ,रुस्वाइयाँ ,बेवफाईयाँ ,सौगाते है इश्क की ,
छोडो सनम माफ़ करो  ये इश्क नहीं मुझ गरीब के बस की ।
*************************************

Thursday, June 23, 2016

क्षणिकाएँ -जिंदगी


क्षणिकाएँ -जिंदगी
-----------------------
१)
जद्दोजहद
कभी खुद से
कभी तुझसे
जारी है
ऐ जिंदगी !
एक दाँव और लगा लूँ
तो चलूँ !

*******
२)
होती रही
रूह की
रस्मो रिवाजो से मुलाकात
और मैं
सोती रही !
**********

3)
ठगते रहे
एक दूजे को हम
कभी वो जीते
कभी मैं
दोनों खुश है
भ्रम  जीते हैं
मैं
और
मेरी जिंदगी !
**********
४)
जिंदगी
तुझे खूब लूटा  मैंने
लम्हा -लम्हा
घूँट -घूँट
पिया मैंने !
*********
हेलो जिंदगी
तुझसे हैं रु -बा-रु
ले चल जहाँ !
*********

Tuesday, March 8, 2016

फल्गु



फल्गु
------------
हाँ
जाने क्यों
हटाने लगा था रेत
और एक दिन
फूट ही पड़ी
वो रूखी  खडूस औरत
बहने लगी फिर से
फल्गु नदी
जिन्दा हो कर । 

Friday, July 24, 2015

प्रेमसाधना,यादें

प्रेमसाधना
---------------
हद से गुजर जाते है 
जब ख्यालो में तुम्हारे
गूंगे हो जाते है अलफ़ाज़
छिप जाते है गहराई में
कही गहरे सागर में
की डाले न विध्न
कोई आवाज़
इस प्रेम साधना में

-----------------------------------------
यादें
-------
यादें नही
गेसुओं में उलझी
जल की नाजुक बूँदें
की
झटक दूँ
और बिखर जाएँ


Friday, June 26, 2015

मोमबत्तियां



क्षणिका
--------------------
मोमबत्तियां
-------------------------

जल उठती है
मोमबत्तियां
हर हादसे के बाद
पर मिटा नहीं पाती  अँधेरा
जला  नही पाती पट्टी
न्याय की देवी की आँखों पर बँधी
पिघला नही पाती
इंसानियत की  धमनी में जम चुके
रक्त के थक्के
 हताश,बुझी  मोमबत्तियां
करने लगती है इन्तजार
फिर
 किसी कली के मसले जाने का..



Wednesday, June 24, 2015

इच्छाए , . भूख ,कतरन



क्षणिकाएँ
-----------
१. इच्छाए
-----------
इच्छाओ की कलम से
लिखी किताब जिंदगी की
भरती  नही
*****************
२. भूख
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भूख
बन जाये इबादत
या की हवस
 तृप्त न होती
****************
३. कतरन
------------
उनसे पूछिये
कतरनों का मोल
जिनके हिस्से आती हैं
उतरन केवल
***************

Sunday, May 31, 2015

अंतिम कश


क्षणिका
----------------
बेबस
देखता रहा
टकटकी लगाये
छलकती ,ममतामयी आँखें
दम तोड़ती
पिता की अभिलाषाएं
धीरे -धीरे
धुएं के छल्लो में
 विलीन होते
जिंदगी लगा चुकी थी
अंतिम कश

Thursday, May 28, 2015

बादल उत्पाती

क्षणिका
-----------

ओ हवाओ

अब तो गति लो
बादल उत्पाती
चले गाँव पिया के
मोड़ दो रुख
दे दो पता
मेरे घर का

Saturday, March 14, 2015

दरारें


दरारें
----------

उफ्फ्फ्फ़ !!!
ये दरारें
भर तो दिया था
रेता , सीमेंट  डाल
ओह !!!
जगह समतल नही हुयी
और
धब्बेदार
 महीन सी लकीर
जाती क्यों नही !!!

Wednesday, March 11, 2015

जब कहीं कुछ नही होता



जब कहीं कुछ नही होता
एक शुन्य पसरा होता है
अनंत ,असीम
उस शून्य में भी कुछ होता है
सतत गतिशील
 कुछ अस्फुट सी आवाजे
या कोई संगीत
निर्विकार भाव से
आस  पास के वातावरण में
तलाशती ……
अपना अस्तित्व ।



Wednesday, March 4, 2015

जीवन के रंग



अंबर ,धरती
फूल ,शूल,पल्लव
सिंधु ,अग्नि ,बादल
 छू कर इन्द्रधनुष
 रह जाता पारदर्शी ,बेरंग
जादूगर पवन
लुटाता प्रकृति पर
जीवन के रंग
क्या यही है --प्रेम ?
शायद यही है प्रेम ---- 

Thursday, February 12, 2015

लिखा है मौन

१ ) अनुबंध
--------------

फूल -तितली 

अम्बर -धरा 
सागर -नदी 
सृष्टि के आरंभ से 
बंधे है प्रीत की डोर
बिना अनुबंध

******************
२)
लिखा है मौन
----------------

 गीत कोई ग़ज़ल 
छंद ,काव्य ,महाकाव्य 
कोई लिखता खुदा 
प्रिया ,जानू, दिलरुबा
कोई लिखता अश्क
बेवफा, रक्कासा, बेरहम
हमने  प्रीत के सजदे
सर झुकाकर
लिखा दिया  है
मौन  !!!

*******************

३)
मीठा  सागर
--------------

नमकीन सिन्धु 

है कितना मीठा 
पूछो सरिता से 
उसने चखा है

Wednesday, February 4, 2015

क्षणिकाये -उगा सूरज , मेरे मन




क्षणिका १ -उगा सूरज
---------------------
लो
उगा सूरज
फ़ैल गया उजियारा
कुछ बड़े बड़े
बंद झरोखे वाले घर
सर उठाये खड़े है
प्रतीक्षित
आज भी
----------------------
क्षणिका २  - मेरे मन
---------------------
 जाओ
खोल दी मुट्ठी
उड़ो
अब
तुम्हारे हौसलों पर निर्भर है
बनोगे तितली
या
छुओगे गगन
मेरे मन





Wednesday, January 21, 2015

क्षणिकायें


क्षणिकायें
१)
हटात  चमकती
भुकभुकाती लौ
टूटता तारा
कौतुहलवश
इन्हें देखना और खुश होना
और बात होती है
इस अवस्था को  जीना
 जिन्दगी नासूर बना देती है
-------------------------------------
२)
जरुरी है
रहे कुछ प्यास अधूरी
पूर्णमासी
है आहट
अमावस्या की 

Friday, January 16, 2015

सूरज का इन्तजार


क्षणिका एक प्रयास -- सुझावों का स्वागत है :)

क्षणिका १)
अजब निराली
आँधियों की अदा
उड़ा ले जाती
धूल पुरानी
धर देती नई
*********
क्षणिका २)
जम गयी है
डल  झील
अब
नहीं चलते शिकारे
हसीं ख़्वाबों के
इन आँखों को है
सूरज का इन्तजार
**************




Friday, August 1, 2014

टूटे झरोखा





पतझड़ बीते अब सावन की बात हो 
नफरत छोड़  मोहब्बत की बात हो 
टूटे झरोखा किसी शीशमहल का
जरुरत है अब पत्थर हरेक हाथ हो 




Friday, May 24, 2013

एक मुट्ठी धुप





बिखरने दो
एक मुट्ठी धुप
आँगन में मेरे
छाँव की कालिमा
अब  सही नहीं जाती


खिलने दो
खुशियों के फूल
बगिया में मेरे
झरते पत्तो  की जुदाई
अब सही नही जाती
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