एक नज़र ..चलते चलते
.
** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *
Sunday, August 31, 2014
बहारें बैचेन है
नगमा ऐ इश्क अब गुनगुना लीजिये शाम से पहले दीपक जला लीजिये
रूठे दिलबर को अब तो मना लीजिये सजदा ऐ इश्क में सर झुका दीजिये
देख कर आईना यूँ न शर्माईये बहारें बैचेन है बाँहें फैलाईये
आँधियों को न यूँ अब हवा दीजिये कश्ती नफरत की अब तो डुबो दीजिये
Friday, August 1, 2014
टूटे झरोखा
पतझड़ बीते अब सावन की बात हो
नफरत छोड़ मोहब्बत की बात हो
टूटे झरोखा किसी शीशमहल का
जरुरत है अब पत्थर हरेक हाथ हो
Monday, March 31, 2014
जागती रही निशा
समेटती रही
यादों की कतरन
शबनम के मोती से
पिरोती रही
मेरे ख्वाबों की माला
बैचैन हवाएं
सर्द रातों में
सुलगाती रही चिंगारियां
अरमानों की राख तले
जागती रही निशा
बन के हमराज
अश्को को मेरे
भर के आँचल में
अम्बर का आँगन
सजाती रही
रात भर .........,,
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