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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Monday, September 18, 2017

अंधेरा

अंधेरा
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उसने अंधकार में डूबे उस पथ पर एक दीया जला कर रख दिया । उसके पास ही एक पर्ची लिख कर रख दी जिस किसी को रोशनी की जरूरत है वो इसमें से रोशनी ले कर जा सकता पर साथ ही इसमें थोड़ा तेल डालता जाय । कुछ घण्टे बाद आस पास की बस्ती के हर घर में धीमा धीमा प्रकाश दिखने लगा ।उस रोशनी के कई टुकड़े हो चुके थे । पर वो दीया बुझ चुका था । वो रास्ता फिर से अंधकार में डूब गया ।

*सुनीता अग्रवाल "नेह"
30/8/2017

Thursday, August 24, 2017

चीर हरण

"हैल्लो"
"गुड मॉर्निंग सर ,मैं जीवन बीमा कंपनी से श्रेया बोल रही हूँ । सर कंपनी ने एक नई पालिसी लॉन्च की है ।जिसमे टैक्स रिलैक्सेशन के साथ कई बेनिफिट्स और भी है । सर क्या मैं आपका कुछ मिनिट ले सकती हूँ ? ताकि मैं आपको डिटेल में उसके फायदे बता सकूँ?"

"
इतने दिलकश आवाज़ में कोई समय माँगे तो भला मना कैसे कर दें । पर मैडम  आपने ये जिस नम्बर से फोन किया है ये लैंडलाइन का नम्बर दिखता है ।आप मुझे अपना मोबाइल नम्बर दीजिये न फिर हम उसी पर सारी रात आराम से डिसकस करते रहेंगे स्कीम के बारे में भी और कुछ अपने आपके बारे में भी ।" 

" सॉरी सर मैं पार्टटाइम जॉब करती हूँ किसी का टाइम पास नही हूँ ।" कहते हुए फोन काटने तक मेरी आवाज में आज फिर  भारीपन उतर चुका था ।

*सुनीता अग्रवाल "नेह"

Thursday, August 17, 2017

कहो न सखी



कहो न सखी

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कहो न सखी
क्या कह रही है पायल तेरी
क्या गुन रही है चूड़ियां तेरी
कहो न सखी .........
ईंटो पर ईंटे जमाती
चल पड़ी हो चाल साधती
गा रही है ये प्रणय गीत
या विरह काव्य है रच रही
कहो न सखी .........
गिट्टियों से सुर मिलाती
बज रही है ये खनखनाती
प्रिय की है ये प्रीत भेंट
या की है बेड़ियाँ डली
कहो न सखी ..........
थक के जब ये चूर होती
मीत की सलवट मिटाती
खोलती है लाज के पट
या मन ही मन है सिसकती
कहो न सखी ............
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