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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Friday, September 21, 2018

प्रतीक्षा (क्षणिकायें )


१)
मैं
 

आरती थाल में सजी 
कर्पूर की डली
कभी मिलना मुझसे 
तुम अग्नि की तरह 

की बस
बची रह जाये सुंगध
उस मिलन उत्सव के बाद
जीवन भर
***************
२)
बीत तो जायेंगी
यूँ चुटकियों में
घड़ियाँ
प्रतीक्षा की
इतना दिलासा भर देते जाओ
कि
लौटोगे
सूरज के बुझने
से पहले
 
***************
३)
ये जो आज फिर व्यस्तता की आड़ लेकर
 तुमने टाल दिया  मेरे सवाल का जवाब
" बाद में बताता हूँ " कह कर
ऐसे कई " बाद में "और ' कल " मेरा उधार है तुम पर
न ..न.. मुझे कोई जल्दी भी नही है
इत्मीनान से चुकाना तुम ये उधार 

जीवन  के  उस बेला में
जब तुम्हारे पास करने को कुछ न हो
जब तुम्हारे पास तुम्हारी बातों को सुनने वाला कोई न हो
तब खोल लेना मेरे सवालों का बही खाता
और इत्मीनान से देते जाना जवाब
हालांकि उस समय तक मेरे लिए वो अर्थहीन हो चुके होंगे
पर फिर भी
मैं बड़े चाव से सुनूँगी तुम्हारी बातों को
ताकि तुम्हारे ठहरे हुए जीवन को
मिल सके पुनः एक नया लक्ष्य
*****************************


5 comments:

विद्या सरन said...

Very nice...

सुनीता अग्रवाल "नेह" said...

Thank you

rdg-funny video said...

Wonderful creation madame.. happy diwali in advance. If you want happy Diwali good night images then you can go here...http://www.theindianpictures.com/2019/10/top-happy-diwali-good-night-images.html

Sony said...

Nice article thanks this post share

classstatus said...

thanks
Urdu poetry is a rich tradition of poetry and has many different

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