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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Monday, December 10, 2012

जीवन चित्र





खुली किताब 
फिर देती  खुशबू
सुखा गुलाब 


नाजुक बड़ी 

खीचना हौले हौले 
डोर रिश्तों की 

जितना चाहा
भूल जाऊ मैं तुम्हे
तू याद आया 


जौहरी रिश्ते
तपा .... बनाते मुझे
सोने सा खरा



कोयला हु मैं
संजोये रखती  हूँ
हीरे  से रिश्तें 

हीरा है पाना?
रँगना होगा तुझे
कोयला रंग
"सन्नाटा छाया
मदहोश है सब
पी गम प्याला
तितली बनूँ
फूलों के रँग चुनु
रँग दूँ जहाँ
इंद्रधनूष
समेटे स्याम रंग
जीवन पट

मीरा दिवानी
रंगी कृष्ण के रंग
भयी जोगन

विविध रंग
बोले है हर रंग
नयी कहानी


चीखती मौत
जीवन  तलाशती
मुर्दा शहर

टूटे से ख्वाब
सजा गये सजन
बीती रतिया

"वाणी अमोल
तोल मोल के बोल
गाँठ ना पड़े

थकी अँखियाँ
चली ख्वाबो की गली
मिलेगेँ पिया

खामोश रात
ढल रहा है चाँद
ख्वाब जागते

श्वेत चाँदनी
धरा ओढ़ मुस्कायी
पूनम रात

झूलेंगेँ श्याम
झूला कदम्ब डार
पूनम रात

जीवन चित्र
विविध न्यारे रंग
वो चित्रकार ...

इन्द्रधनुष
समेटे श्याम रंग
अद्भुत  दृश्य

रहस्यमयी
प्रश्नोत्तरी ...अनूठी
सुलझे न क्यूँ ??

अन्जानी राह
कठिन है डगर
है अग्निपथ

जीवन क्या है 
कठिन है डगर 
ये अग्निपथ 

जीवन क्या है
  विरह गीत कभी 
प्रेमसंगीत 



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