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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Thursday, June 23, 2016

क्षणिकाएँ -जिंदगी


क्षणिकाएँ -जिंदगी
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१)
जद्दोजहद
कभी खुद से
कभी तुझसे
जारी है
ऐ जिंदगी !
एक दाँव और लगा लूँ
तो चलूँ !

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२)
होती रही
रूह की
रस्मो रिवाजो से मुलाकात
और मैं
सोती रही !
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3)
ठगते रहे
एक दूजे को हम
कभी वो जीते
कभी मैं
दोनों खुश है
भ्रम  जीते हैं
मैं
और
मेरी जिंदगी !
**********
४)
जिंदगी
तुझे खूब लूटा  मैंने
लम्हा -लम्हा
घूँट -घूँट
पिया मैंने !
*********
हेलो जिंदगी
तुझसे हैं रु -बा-रु
ले चल जहाँ !
*********
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