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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Thursday, February 12, 2015

लिखा है मौन

१ ) अनुबंध
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फूल -तितली 

अम्बर -धरा 
सागर -नदी 
सृष्टि के आरंभ से 
बंधे है प्रीत की डोर
बिना अनुबंध

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२)
लिखा है मौन
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 गीत कोई ग़ज़ल 
छंद ,काव्य ,महाकाव्य 
कोई लिखता खुदा 
प्रिया ,जानू, दिलरुबा
कोई लिखता अश्क
बेवफा, रक्कासा, बेरहम
हमने  प्रीत के सजदे
सर झुकाकर
लिखा दिया  है
मौन  !!!

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३)
मीठा  सागर
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नमकीन सिन्धु 

है कितना मीठा 
पूछो सरिता से 
उसने चखा है
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