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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Friday, February 13, 2015

कुछ गीत अधूरे रहने दो



कुछ दर्द अधूरे रहने दो
कुछ सर्द हवाएँ बहने दो
सिलसिले  रहे यूँ ही चलते
कुछ हर्फ़ अधूरे रहने दो
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तेरी खामोश नजरो ने
एक सरगम सी छेड़ी है
छू  कर  मुझको बहकाती
 ये  बैरन हवा बसंती है
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मेरे भावो का विस्तार हो तुम
मेरे गीतों का अभिसार हो तुम
छेड़ जाती है जब हौले से हवा
दहका बहका सा  रुखसार हो तुम
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