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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Wednesday, June 24, 2015

इच्छाए , . भूख ,कतरन



क्षणिकाएँ
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१. इच्छाए
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इच्छाओ की कलम से
लिखी किताब जिंदगी की
भरती  नही
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२. भूख
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भूख
बन जाये इबादत
या की हवस
 तृप्त न होती
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३. कतरन
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उनसे पूछिये
कतरनों का मोल
जिनके हिस्से आती हैं
उतरन केवल
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