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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Sunday, June 28, 2015

दोहे - सावन ,साजन



दोहे एक प्रयास
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१) सावन बरसा झूम के , खिले शाख पर बौर ।
   सूखा  आँगन "नेह " का , वृद्धाश्रम अब ठौर ॥
२) नैना बरसे दिवस निशि , बाँझ कहे जो कोय ।
   कभी न सूखे मेह से , बीज अंकुरित होय । ।
३ ) पिया- पिया जपे मन ये ,भँवरे सा मँड़राय ।
   "नेह" न मीरा साधिका,  मोहन कैसे पाय ।
४) पिया प्रवासी कर रहे ,मैमन के सँग रास  ।
    "नेह " विरहिनी खोलती , चन्द्र  देख उपवास ॥ 
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