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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Thursday, April 25, 2013

दुर्लभ काया




 काया दुल्हन
चढ़ पालकी चली
पिया मिलन

तन पिंजरा
उड़ जाएगा पंछी
अनंत यात्रा

दुर्लभ काया
देवगण तरसे
 वृथा  गंवाया

रूह मदारी
तन कठपुतली
कहे नाचो री

देह नश्वर
कहते ज्ञानी जन
आत्मा अमर

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