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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Saturday, March 14, 2015

दरारें


दरारें
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उफ्फ्फ्फ़ !!!
ये दरारें
भर तो दिया था
रेता , सीमेंट  डाल
ओह !!!
जगह समतल नही हुयी
और
धब्बेदार
 महीन सी लकीर
जाती क्यों नही !!!
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