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** हेलो जिन्दगी * * तुझसे हूँ रु-ब-रु * * ले चल जहां * *

Sunday, May 31, 2015

बेवफा

मुक्तक एक प्रयास
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किन रिश्तों की अब वो बात करते हैं
जिन्हे बाजार में नीलाम करते है
सितम सह उनके हम जो मुस्करा दिये
बेवफा कह डाला कमाल करते हैं  ।


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